Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुई भीषण आग की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। कुछ ही मिनटों में धुएं और आग की लपटों ने एक ऐसी इमारत को मौत के जाल में बदल दिया, जहां भविष्य के सपने संजोए युवा पढ़ाई और काम में व्यस्त थे। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। लेकिन इस त्रासदी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इस हादसे का असली जिम्मेदार कौन है? लापरवाही की खुलीं परतें जानकारी के अनुसार, जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी, वह मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए बनाई गई थी। बाद में इसमें विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं। भवन में पेट शॉप, वेटरनरी क्लिनिक, कोचिंग सेंटर और एक एनिमेशन स्टूडियो संचालित हो रहा था। यहां बड़ी संख्या में छात्र और युवा कर्मचारी मौजूद थे, जब अचानक आग ने विकराल रूप ले लिया।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के कुछ ही देर बाद पूरा भवन घने धुएं से भर गया। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इमारत में बाहर निकलने का पर्याप्त इंतजाम नहीं था। बचाव के लिए केवल एक मुख्य रास्ता था, जो कुछ ही देर में आग और धुएं की चपेट में आ गया। नतीजतन कई लोग ऊपरी मंजिलों पर फंस गए। जान बचाने की जद्दोजहद अंदर मौजूद छात्रों और कर्मचारियों ने अपनी जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। कुछ लोग बाथरूम में छिप गए, यह सोचकर कि वहां धुएं का असर कम होगा। कुछ ने खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश की, जबकि कुछ लोगों ने ऊंचाई से छलांग लगाकर जान बचाने का प्रयास किया। कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि कुछ को समय रहते बाहर निकाल लिया गया। घटनास्थल के बाहर का दृश्य भी कम दर्दनाक नहीं था। अपने बच्चों और परिजनों की तलाश में पहुंचे परिवारों की चीख-पुकार ने माहौल को और भयावह बना दिया। कई माता-पिता घंटों तक अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार करते रहे। जब एक-एक कर शव बाहर निकाले जाने लगे तो वहां मौजूद लोगों का दर्द और बेबसी साफ दिखाई देने लगी। राहत कार्य में जुटा पूरा इलाका स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती दौर में राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने खिड़कियों के शीशे तोड़े, अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की और दमकल कर्मियों की हर संभव मदद की। बाद में फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हादसे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संबंधित विभागों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कई लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। हालांकि, सवाल यह है कि यदि सुरक्षा मानकों की समय रहते जांच होती और आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद होतीं, तो क्या इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी? जवाब तलाश रही जांच यह हादसा केवल एक आग की घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार लोगों की चूक का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि आखिर किन गलतियों ने 15 परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए। फिलहाल लखनऊ का यह अग्निकांड उन सवालों को पीछे छोड़ गया है, जिनके जवाब पूरे समाज और प्रशासन को तलाशने होंगे। ये भी पढ़ें: लखनऊ में आग का तांडव, तीन मंजिला इमारत बनी मौत का फंदा, 14 लोगों की मौत